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ऋग्वेद 18.22

ये चि॒द्धि मृ॒त्युब॑न्धव॒ आदि॑त्या॒ मन॑व॒ः स्मसि॑ । प्र सू न॒ आयु॑र्जी॒वसे॑ तिरेतन ॥२२॥

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