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ऋग्वेद 18.20

बृ॒हद्वरू॑थं म॒रुतां॑ दे॒वं त्रा॒तार॑म॒श्विना॑ । मि॒त्रमी॑महे॒ वरु॑णं स्व॒स्तये॑ ॥२०॥

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