Utshovऐप डाउनलोड करें

ऋग्वेद 18.14

समित्तम॒घम॑श्नवद्दु॒ःशंसं॒ मर्त्यं॑ रि॒पुम् । यो अ॑स्म॒त्रा दु॒र्हणा॑वाँ॒ उप॑ द्व॒युः ॥१४॥

पूरा अध्याय