ग्रंथऋग्वेदमण्डल 8सूक्त 1717.2ऋग्वेद 17.2आ त्वा॑ ब्रह्म॒युजा॒ हरी॒ वह॑तामिन्द्र के॒शिना॑ । उप॒ ब्रह्मा॑णि नः शृणु ॥२॥पिछलाअगलापूरा अध्याय