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ऋग्वेद 15.10

त्वं वृषा॒ जना॑नां॒ मंहि॑ष्ठ इन्द्र जज्ञिषे । स॒त्रा विश्वा॑ स्वप॒त्यानि॑ दधिषे ॥१०॥

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