ग्रंथऋग्वेदमण्डल 8सूक्त 1414.5ऋग्वेद 14.5य॒ज्ञ इन्द्र॑मवर्धय॒द्यद्भूमिं॒ व्यव॑र्तयत् । च॒क्रा॒ण ओ॑प॒शं दि॒वि ॥५॥पिछलाअगलापूरा अध्याय