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ऋग्वेद 13.31

वृषा॒यमि॑न्द्र ते॒ रथ॑ उ॒तो ते॒ वृष॑णा॒ हरी॑ । वृषा॒ त्वं श॑तक्रतो॒ वृषा॒ हव॑ः ॥३१॥

पूरा अध्याय