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ऋग्वेद 13.28

अ॒भि स्व॑रन्तु॒ ये तव॑ रु॒द्रास॑ः सक्षत॒ श्रिय॑म् । उ॒तो म॒रुत्व॑ती॒र्विशो॑ अ॒भि प्रय॑ः ॥२८॥

पूरा अध्याय