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ऋग्वेद 13.22

क॒दा त॑ इन्द्र गिर्वणः स्तो॒ता भ॑वाति॒ शंत॑मः । क॒दा नो॒ गव्ये॒ अश्व्ये॒ वसौ॑ दधः ॥२२॥

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