ग्रंथऋग्वेदमण्डल 8सूक्त 1313.17ऋग्वेद 13.17तमिद्विप्रा॑ अव॒स्यव॑ः प्र॒वत्व॑तीभिरू॒तिभि॑ः । इन्द्रं॑ क्षो॒णीर॑वर्धयन्व॒या इ॑व ॥१७॥पिछलाअगलापूरा अध्याय