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ऋग्वेद 12.31

इ॒मां त॑ इन्द्र सुष्टु॒तिं विप्र॑ इयर्ति धी॒तिभि॑ः । जा॒मिं प॒देव॒ पिप्र॑तीं॒ प्राध्व॒रे ॥३१॥

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