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ऋग्वेद 102.16

अग्ने॑ घृ॒तस्य॑ धी॒तिभि॑स्तेपा॒नो दे॑व शो॒चिषा॑ । आ दे॒वान्व॑क्षि॒ यक्षि॑ च ॥१६॥

पूरा अध्याय