Utshovऐप डाउनलोड करें

ऋग्वेद 102.14

यस्य॑ त्रि॒धात्ववृ॑तं ब॒र्हिस्त॒स्थावसं॑दिनम् । आप॑श्चि॒न्नि द॑धा प॒दम् ॥१४॥

पूरा अध्याय