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ऋग्वेद 95.5

इ॒मा जुह्वा॑ना यु॒ष्मदा नमो॑भि॒ः प्रति॒ स्तोमं॑ सरस्वति जुषस्व ।
तव॒ शर्म॑न्प्रि॒यत॑मे॒ दधा॑ना॒ उप॑ स्थेयाम शर॒णं न वृ॒क्षम् ॥५॥

पूरा अध्याय