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ऋग्वेद 94.2

शृ॒णु॒तं ज॑रि॒तुर्हव॒मिन्द्रा॑ग्नी॒ वन॑तं॒ गिर॑ः । ई॒शा॒ना पि॑प्यतं॒ धिय॑ः ॥२॥

पूरा अध्याय