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ऋग्वेद 91.4

याव॒त्तर॑स्त॒न्वो॒३ याव॒दोजो॒ याव॒न्नर॒श्चक्ष॑सा॒ दीध्या॑नाः ।
शुचिं॒ सोमं॑ शुचिपा पातम॒स्मे इन्द्र॑वायू॒ सद॑तं ब॒र्हिरेदम् ॥४॥

पूरा अध्याय