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ऋग्वेद 78.2

प्रति॑ षीम॒ग्निर्ज॑रते॒ समि॑द्ध॒ः प्रति॒ विप्रा॑सो म॒तिभि॑र्गृ॒णन्त॑ः ।
उ॒षा या॑ति॒ ज्योति॑षा॒ बाध॑माना॒ विश्वा॒ तमां॑सि दुरि॒ताप॑ दे॒वी ॥२॥

पूरा अध्याय