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ऋग्वेद 74.4

अश्वा॑सो॒ ये वा॒मुप॑ दा॒शुषो॑ गृ॒हं यु॒वां दीय॑न्ति॒ बिभ्र॑तः ।
म॒क्षू॒युभि॑र्नरा॒ हये॑भिरश्वि॒ना ऽऽदे॑वा यातमस्म॒यू ॥४॥

पूरा अध्याय