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ऋग्वेद 68.3

प्र वां॒ रथो॒ मनो॑जवा इयर्ति ति॒रो रजां॑स्यश्विना श॒तोति॑ः । अ॒स्मभ्यं॑ सूर्यावसू इया॒नः ॥३॥

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