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ऋग्वेद 66.10

ब॒हव॒ः सूर॑चक्षसोऽग्निजि॒ह्वा ऋ॑ता॒वृध॑ः । त्रीणि॒ ये ये॒मुर्वि॒दथा॑नि धी॒तिभि॒र्विश्वा॑नि॒ परि॑भूतिभिः ॥१०॥

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