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ऋग्वेद 61.6

समु॑ वां य॒ज्ञं म॑हयं॒ नमो॑भिर्हु॒वे वां॑ मित्रावरुणा स॒बाध॑ः ।
प्र वां॒ मन्मा॑न्यृ॒चसे॒ नवा॑नि कृ॒तानि॒ ब्रह्म॑ जुजुषन्नि॒मानि॑ ॥६॥

पूरा अध्याय