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ऋग्वेद 59.5

ओ षु घृ॑ष्विराधसो या॒तनान्धां॑सि पी॒तये॑ ।
इ॒मा वो॑ ह॒व्या म॑रुतो र॒रे हि कं॒ मो ष्व१न्यत्र॑ गन्तन ॥५॥

पूरा अध्याय