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ऋग्वेद 52.2

मि॒त्रस्तन्नो॒ वरु॑णो मामहन्त॒ शर्म॑ तो॒काय॒ तन॑याय गो॒पाः ।
मा वो॑ भुजेमा॒न्यजा॑त॒मेनो॒ मा तत्क॑र्म वसवो॒ यच्चय॑ध्वे ॥२॥

पूरा अध्याय