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ऋग्वेद 36.9

अच्छा॒यं वो॑ मरुत॒ः श्लोक॑ ए॒त्वच्छा॒ विष्णुं॑ निषिक्त॒पामवो॑भिः ।
उ॒त प्र॒जायै॑ गृण॒ते वयो॑ धुर्यू॒यं पा॑त स्व॒स्तिभि॒ः सदा॑ नः ॥९॥

पूरा अध्याय