ग्रंथऋग्वेदमण्डल 7सूक्त 3434.5ऋग्वेद 34.5अ॒भि प्र स्था॒ताहे॑व य॒ज्ञं याते॑व॒ पत्म॒न्त्मना॑ हिनोत ॥५॥पिछलाअगलापूरा अध्याय