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ऋग्वेद 32.6

स वी॒रो अप्र॑तिष्कुत॒ इन्द्रे॑ण शूशुवे॒ नृभि॑ः ।
यस्ते॑ गभी॒रा सव॑नानि वृत्रहन्त्सु॒नोत्या च॒ धाव॑ति ॥६॥

पूरा अध्याय