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ऋग्वेद 32.2

इ॒मे हि ते॑ ब्रह्म॒कृत॑ः सु॒ते सचा॒ मधौ॒ न मक्ष॒ आस॑ते ।
इन्द्रे॒ कामं॑ जरि॒तारो॑ वसू॒यवो॒ रथे॒ न पाद॒मा द॑धुः ॥२॥

पूरा अध्याय