ग्रंथऋग्वेदमण्डल 7सूक्त 3232.18ऋग्वेद 32.18यदि॑न्द्र॒ याव॑त॒स्त्वमे॒ताव॑द॒हमीशी॑य । स्तो॒तार॒मिद्दि॑धिषेय रदावसो॒ न पा॑प॒त्वाय॑ रासीय ॥१८॥पिछलाअगलापूरा अध्याय