ग्रंथऋग्वेदमण्डल 7सूक्त 3131.4ऋग्वेद 31.4व॒यमि॑न्द्र त्वा॒यवो॒ऽभि प्र णो॑नुमो वृषन् । वि॒द्धी त्व१स्य नो॑ वसो ॥४॥पिछलाअगलापूरा अध्याय