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ऋग्वेद 31.10

प्र वो॑ म॒हे म॑हि॒वृधे॑ भरध्वं॒ प्रचे॑तसे॒ प्र सु॑म॒तिं कृ॑णुध्वम् । विश॑ः पू॒र्वीः प्र च॑रा चर्षणि॒प्राः ॥१०॥

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