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ऋग्वेद 30.4

व॒यं ते त॑ इन्द्र॒ ये च॑ देव॒ स्तव॑न्त शूर॒ दद॑तो म॒घानि॑ ।
यच्छा॑ सू॒रिभ्य॑ उप॒मं वरू॑थं स्वा॒भुवो॑ जर॒णाम॑श्नवन्त ॥४॥

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