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ऋग्वेद 28.2

हवं॑ त इन्द्र महि॒मा व्या॑न॒ड्ब्रह्म॒ यत्पासि॑ शवसि॒न्नृषी॑णाम् ।
आ यद्वज्रं॑ दधि॒षे हस्त॑ उग्र घो॒रः सन्क्रत्वा॑ जनिष्ठा॒ अषा॑ळ्हः ॥२॥

पूरा अध्याय