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ऋग्वेद 19.4

त्वं नृभि॑र्नृमणो दे॒ववी॑तौ॒ भूरी॑णि वृ॒त्रा ह॑र्यश्व हंसि ।
त्वं नि दस्युं॒ चुमु॑रिं॒ धुनिं॒ चाऽस्वा॑पयो द॒भीत॑ये सु॒हन्तु॑ ॥४॥

पूरा अध्याय