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ऋग्वेद 104.25

प्रति॑ चक्ष्व॒ वि च॒क्ष्वेन्द्र॑श्च सोम जागृतम् । रक्षो॑भ्यो व॒धम॑स्यतम॒शनिं॑ यातु॒मद्भ्य॑ः ॥२५॥

पूरा अध्याय