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ऋग्वेद 1.10

इ॒मे नरो॑ वृत्र॒हत्ये॑षु॒ शूरा॒ विश्वा॒ अदे॑वीर॒भि स॑न्तु मा॒याः ।
ये मे॒ धियं॑ प॒नय॑न्त प्रश॒स्ताम् ॥१०॥

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