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ऋग्वेद 72.2

इन्द्रा॑सोमा वा॒सय॑थ उ॒षास॒मुत्सूर्यं॑ नयथो॒ ज्योति॑षा स॒ह ।
उप॒ द्यां स्क॒म्भथु॒ः स्कम्भ॑ने॒नाप्र॑थतं पृथि॒वीं मा॒तरं॒ वि ॥२॥

पूरा अध्याय