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ऋग्वेद 59.3

ओ॒कि॒वांसा॑ सु॒ते सचाँ॒ अश्वा॒ सप्ती॑ इ॒वाद॑ने । इन्द्रा॒ न्व१ग्नी अव॑से॒ह व॒ज्रिणा॑ व॒यं दे॒वा ह॑वामहे ॥३॥

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