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ऋग्वेद 51.16

अपि॒ पन्था॑मगन्महि स्वस्ति॒गाम॑ने॒हस॑म् । येन॒ विश्वा॒ः परि॒ द्विषो॑ वृ॒णक्ति॑ वि॒न्दते॒ वसु॑ ॥१६॥

पूरा अध्याय