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ऋग्वेद 48.16

आ मा॑ पूष॒न्नुप॑ द्रव॒ शंसि॑षं॒ नु ते॑ अपिक॒र्ण आ॑घृणे । अ॒घा अ॒र्यो अरा॑तयः ॥१६॥

पूरा अध्याय