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ऋग्वेद 45.21

स नो॑ नि॒युद्भि॒रा पृ॑ण॒ कामं॒ वाजे॑भिर॒श्विभि॑ः । गोम॑द्भिर्गोपते धृ॒षत् ॥२१॥

पूरा अध्याय