ग्रंथऋग्वेदमण्डल 6सूक्त 4545.2ऋग्वेद 45.2अ॒वि॒प्रे चि॒द्वयो॒ दध॑दना॒शुना॑ चि॒दर्व॑ता । इन्द्रो॒ जेता॑ हि॒तं धन॑म् ॥२॥पिछलाअगलापूरा अध्याय