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ऋग्वेद 44.17

ए॒ना म॑न्दा॒नो ज॒हि शू॑र॒ शत्रू॑ञ्जा॒मिमजा॑मिं मघवन्न॒मित्रा॑न् ।
अ॒भि॒षे॒णाँ अ॒भ्या॒३देदि॑शाना॒न्परा॑च इन्द्र॒ प्र मृ॑णा ज॒ही च॑ ॥१७॥

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