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ऋग्वेद 40.1

इन्द्र॒ पिब॒ तुभ्यं॑ सु॒तो मदा॒याऽव॑ स्य॒ हरी॒ वि मु॑चा॒ सखा॑या ।
उ॒त प्र गा॑य ग॒ण आ नि॒षद्याऽथा॑ य॒ज्ञाय॑ गृण॒ते वयो॑ धाः ॥१॥

पूरा अध्याय