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ऋग्वेद 39.5

नू गृ॑णा॒नो गृ॑ण॒ते प्र॑त्न राज॒न्निष॑ः पिन्व वसु॒देया॑य पू॒र्वीः ।
अ॒प ओष॑धीरवि॒षा वना॑नि॒ गा अर्व॑तो॒ नॄनृ॒चसे॑ रिरीहि ॥५॥

पूरा अध्याय