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ऋग्वेद 2.4

ऋध॒द् यस्ते॑ सु॒दान॑वे धि॒या मर्त॑ः श॒शम॑ते । ऊ॒ती ष बृ॑ह॒तो दि॒वो द्वि॒षो अंहो॒ न त॑रति ॥४॥

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