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ऋग्वेद 16.32

त्वं तं दे॑व जि॒ह्वया॒ परि॑ बाधस्व दु॒ष्कृत॑म् । मर्तो॒ यो नो॒ जिघां॑सति ॥३२॥

पूरा अध्याय