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ऋग्वेद 16.10

अग्न॒ आ या॑हि वी॒तये॑ गृणा॒नो ह॒व्यदा॑तये । नि होता॑ सत्सि ब॒र्हिषि॑ ॥१०॥

पूरा अध्याय