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ऋग्वेद 13.5

ता नृभ्य॒ आ सौ॑श्रव॒सा सु॒वीरा ऽग्ने॑ सूनो सहसः पु॒ष्यसे॑ धाः ।
कृ॒णोषि॒ यच्छव॑सा॒ भूरि॑ प॒श्वो वयो॒ वृका॑या॒रये॒ जसु॑रये ॥५॥

पूरा अध्याय