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ऋग्वेद 9.4

उ॒त स्म॑ दुर्गृभीयसे पु॒त्रो न ह्वा॒र्याणा॑म् ।
पु॒रू यो दग्धासि॒ वना ऽग्ने॑ प॒शुर्न यव॑से ॥४॥

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