ग्रंथऋग्वेदमण्डल 5सूक्त 8686.2ऋग्वेद 86.2या पृत॑नासु दु॒ष्टरा॒ या वाजे॑षु श्र॒वाय्या॑ । या पञ्च॑ चर्ष॒णीर॒भी॑न्द्रा॒ग्नी ता ह॑वामहे ॥२॥पिछलाअगलापूरा अध्याय